अरवल। व्यवहार न्यायालय, अरवल ने एक अहम मामले में बड़ा आदेश देते हुए तत्कालीन थाना अध्यक्ष अवधेश कुमार और एफसीआई के जिला प्रबंधक अमरेंद्र कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ गैर-जमानतीय वारंट (NBW) जारी करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायालय द्वारा दोनों अभियुक्तों की लगातार अनुपस्थिति के कारण दिया गया।
मामला वर्ष 2023 से जुड़ा है, जब अरवल सदर प्रखंड स्थित एफसीआई के पांच गोदामों में चावल और गेहूं की हेराफेरी का आरोप सामने आया था। जिला प्रबंधक अमरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने बिना किसी लिखित शिकायत के रूटीन जांच के आधार पर गोदाम की जांच कराई थी और विभागीय सहायक प्रबंधक हरिशंकर सिंह पर अनाज की हेराफेरी का आरोप लगाते हुए कार्रवाई के लिए पत्र भेजा गया था।
इसके बाद जिला पदाधिकारी, अरवल के निर्देश पर अनुमंडल पदाधिकारी दुर्गेश कुमार के नेतृत्व में पांच सदस्यीय जांच दल का गठन किया गया। जांच के दौरान गोदाम की चाबी एक जिला प्रबंधक अमरेंद्र कुमार और दूसरी चाबी कार्यपालक पदाधिकारी ज्वाला राम को सौंपी गई थी। इसी बीच सहायक प्रबंधक हरिशंकर सिंह ने आरोप लगाया कि गोदाम से अनाज की हेराफेरी स्वयं जिला प्रबंधक द्वारा की गई है और इस संबंध में तत्कालीन थाना अध्यक्ष अवधेश कुमार को प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए आवेदन दिया गया था, लेकिन थाना अध्यक्ष द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की गई।
बाद में जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर जिला पदाधिकारी के निर्देश पर जिला प्रबंधक अमरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने हरिशंकर सिंह के खिलाफ लगभग 1 करोड़ 82 लाख रुपये मूल्य के चावल और गेहूं की बिक्री का आरोप लगाते हुए प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसके बाद हरिशंकर सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया। जमानत पर रिहा होने के बाद हरिशंकर सिंह ने न्यायालय, अरवल में अधिवक्ता रंजय कुमार के माध्यम से मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी के समक्ष परिवाद पत्र दाखिल किया।
इस परिवाद को स्वीकार करते हुए इसे परिवाद संख्या 262/2024 के रूप में दर्ज किया गया और मामले की सुनवाई न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी, अरवल श्रीमती उर्मिला आर्या को सौंपी गई। साक्ष्य और जांच के आधार पर न्यायालय ने दिनांक 15 नवंबर 2025 को प्रथम दृष्टया दोषी पाते हुए अवधेश कुमार और अमरेंद्र कुमार श्रीवास्तव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की कई गंभीर धाराओं में संज्ञान लिया।
न्यायालय द्वारा दोनों अभियुक्तों को समन भेजा गया, लेकिन वे अब तक न्यायालय में उपस्थित नहीं हुए। इसी कारण 8 जनवरी 2026 को अदालत ने दोनों के खिलाफ गैर-जमानतीय वारंट जारी करने का आदेश दिया।
उधर, अरवल थाना कांड संख्या 191/2023 का पूरक अनुसंधान अब तक स्पष्ट नहीं हो सका है, जिस पर भी सवाल उठ रहे हैं। इस संदर्भ में के. वारास्वामी बनाम भारत संघ मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला दिया गया है, जिसमें कहा गया है कि अन्वेषण अधिकारी के लिए यह आवश्यक नहीं है कि वह जांच के दौरान अभियुक्त को हर चरण में सुनवाई का अवसर प्रदान करे।
मामले को लेकर जिले में चर्चा तेज है और अब सभी की निगाहें आगे की न्यायिक कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
