अरवल। नगर परिषद क्षेत्र में स्थित कारगिल पार्क को बने लगभग एक साल होने जा रहा है, लेकिन आज तक यह तय नहीं हो पाया कि इस पार्क का निर्माण आखिर किसने कराया, किस योजना के तहत हुआ और कितनी राशि खर्च की गई। बीते साल फरवरी महीने में बनकर तैयार हुए इस पार्क में न तो अंदर, न बाहर और न ही आसपास कहीं कोई शिलापट्ट लगाया गया है, जो सरकारी कार्यों में पारदर्शिता का पहला पैमाना माना जाता है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि उद्घाटन के समय विकास और सौंदर्यीकरण के बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन एक साल बीतने के बाद भी पार्क से जुड़ी बुनियादी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई। सूत्रों के अनुसार, इस पार्क के निर्माण पर 25 लाख रुपये से अधिक की राशि खर्च की गई है, मगर नगर परिषद की ओर से आज तक न तो लागत का विवरण जारी किया गया और न ही निर्माण एजेंसी का नाम सामने आया।
सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कारगिल पार्क अब पूरी तरह लावारिस हालत में नजर आ रहा है। रखरखाव के नाम पर कोई व्यवस्था नहीं है, न ही इसकी सुरक्षा या संरक्षण को लेकर कोई ठोस योजना दिखाई देती है। ऊपर से नहर किनारे प्रस्तावित बाइपास सड़क निर्माण ने इस पार्क के भविष्य पर ही सवालिया निशान लगा दिया है। आशंका जताई जा रही है कि बाइपास निर्माण की जद में आकर यह पार्क बहुत जल्द क्षतिग्रस्त या पूरी तरह समाप्त हो सकता है।
अब सवाल यह उठता है कि जब जनता के टैक्स से 25 लाख रुपये से अधिक खर्च किए गए, तो शिलापट्ट क्यों नहीं लगाया गया? क्या लागत और जिम्मेदारों की जानकारी जानबूझकर छिपाई जा रही है? और अगर पार्क को बचाने या स्थानांतरित करने की कोई योजना नहीं है, तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने का औचित्य क्या था?
नगर परिषद की चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है। जनता मांग कर रही है कि पार्क निर्माण से जुड़ी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जाए, जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय हो और यह स्पष्ट किया जाए कि बाइपास निर्माण के बाद कारगिल पार्क का भविष्य क्या होगा।
अन्यथा यह पार्क भी अरवल में अधूरे विकास, लापरवाही और कथित अनियमितताओं की एक और मिसाल बनकर रह जाएगा।
