नई दिल्ली में गुरुवार को बिहार विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद कांग्रेस ने समीक्षा बैठक की, जो अपेक्षित आत्ममंथन के बजाय भारी हंगामे में बदल गई। बैठक में चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों ने हार के कारणों को सामने रखा, लेकिन चर्चा के बीच टिकट बंटवारे, बाहरी प्रत्याशियों और फ्रेंडली फाइट जैसी गंभीर शिकायतों ने माहौल को तनावपूर्ण बना दिया। खास बात यह रही कि जब हंगामा हुआ, उस दौरान राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे बैठक में पहुंचे भी नहीं थे।
बैठक में वैश्याली से कांग्रेस उम्मीदवार रहे संजीव सिंह ने फ्रेंडली फाइट वाली सीटों का मुद्दा उठाया। इसी दौरान कुछ नेताओं द्वारा टोके जाने पर उनका गुस्सा भड़क उठा। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार संजीव सिंह ने गाली-गलौज की और यहां तक कह दिया—“बहुत बोलोगे तो गोली मार दूंगा।” स्थिति बिगड़ती देख वरिष्ठ नेताओं ने बीच-बचाव किया। हालांकि कांग्रेस सांसद पप्पू यादव ने इस आरोप को पूरी तरह झूठ बताया और कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई।
उल्लेखनीय है कि बिहार में कांग्रेस ने 60 सीटों पर चुनाव लड़ा था, लेकिन उसके हिस्से केवल 6 सीटें आईं। संजीव सिंह का कहना था कि टिकट वितरण गलत था और उसी समय पार्टी की हार तय हो गई थी। उनकी अपनी सीट भी फ्रेंडली फाइट वाली श्रेणी में थी।
बैठक के बाद कांग्रेस नेता मुसव्विर आलम ने कहा कि सीमांचल में ओवैसी फैक्टर काफी असरदार रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि AIMIM ने BJP के साथ मिलकर ऐसा नैरेटिव गढ़ा, जिसका प्रभाव पूरे बिहार में दिखा। वहीं तौकीर आलम ने सीट बदले जाने को अपनी हार का प्रमुख कारण बताया। उनका कहना था कि नाम देर से घोषित होने के कारण तैयारी अधूरी रह गई।
कांग्रेस नेताओं ने कहा कि पार्टी हार से निराश नहीं है और राहुल गांधी–खड़गे की नेतृत्व में संगठन को और मजबूत किया जाएगा।
