अरवल। जिले के आनंद विहार रिसॉर्ट में भारतरत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। इस अवसर पर उनके तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और स्थानीय लोग मौजूद रहे, जिन्होंने उनके विचारों और जीवन मूल्यों को याद किया।
समाजवादी विचारधारा के प्रतीक थे कर्पूरी ठाकुर
जयंती समारोह की अध्यक्षता लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के जिला अध्यक्ष सत्येन्द्र रंजन ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की ईमानदारी और सादगी आज भी राजनीति के लिए एक मिसाल है। उन्होंने बिहार के दूसरे उपमुख्यमंत्री और दो बार मुख्यमंत्री के रूप में कार्य करते हुए सत्ता को सेवा का माध्यम बनाया।
मुख्यमंत्री रहते हुए भी सामान्य जीवन
वक्ताओं ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने कभी अपने पद का प्रदर्शन नहीं किया। वे आम नागरिकों की तरह लोगों से मिलते-जुलते थे और जनसमस्याओं को प्राथमिकता देते थे। लंबा राजनीतिक जीवन बिताने के बावजूद उन्होंने अपने लिए कोई संपत्ति नहीं जुटाई, जो आज के राजनीतिक माहौल में दुर्लभ उदाहरण है।
सामाजिक न्याय के लिए आजीवन संघर्ष
कर्पूरी ठाकुर दशकों तक विधायक और विधानसभा में विपक्ष के नेता भी रहे। विशेष बात यह रही कि वे कभी विधानसभा चुनाव नहीं हारे। उनके जीवन का मूल उद्देश्य सामाजिक न्याय, पिछड़े और वंचित वर्गों को अधिकार दिलाना था। उनका चर्चित नारा — “अधिकार चाहो तो लड़ना सीखो” — आज भी युवाओं को प्रेरणा देता है।
स्थानीय राजनीति और युवाओं पर प्रभाव
इस आयोजन के माध्यम से स्थानीय स्तर पर राजनीतिक कार्यकर्ताओं और युवाओं को जननायक के विचारों से जोड़ने का प्रयास किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यदि वर्तमान पीढ़ी कर्पूरी ठाकुर के सिद्धांतों को अपनाए, तो राजनीति में
विश्वास और नैतिकता फिर से मजबूत हो सकती है।
आगे क्या हो सकता है
कार्यक्रम के दौरान यह संकेत भी दिया गया कि आने वाले समय में जिले में सामाजिक न्याय और राजनीतिक जागरूकता से जुड़े और आयोजन किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी को जननायक के विचारों से जोड़ा जा सके।
कार्यक्रम में जिला और प्रखंड स्तर के कई पदाधिकारी एवं सैकड़ों कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
