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    मतदाता सूची में बड़ा शुद्धिकरण, SIR के पहले चरण में साढ़े छह करोड़ नाम कटे

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    नई दिल्ली | चुनावी सिस्टम की बड़ी सफाई

    देश की चुनावी व्यवस्था में अब तक का सबसे बड़ा शुद्धिकरण सामने आया है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल सहित 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे मतदाता सूची के विशेष सघन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण में ही करीब 6.5 करोड़ मतदाता मृत, स्थानांतरित, दो जगह पंजीकृत या लंबे समय से अनुपस्थित पाए गए हैं। चुनाव आयोग ने इन सभी नामों को मसौदा मतदाता सूची से हटा दिया है


    उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा नाम कटे

    चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इन 12 राज्यों में उत्तर प्रदेश अकेला ऐसा राज्य है जहां 2.89 करोड़ मतदाता मृत, स्थानांतरित या दोहरे पाए गए हैं। हालांकि यूपी की मसौदा मतदाता सूची अभी जारी नहीं हुई है और इसे 31 दिसंबर को प्रकाशित किया जाएगा।
    वहीं उत्तर प्रदेश को छोड़कर बाकी 11 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मसौदा सूची जारी हो चुकी है


    तमिलनाडु दूसरे, गुजरात-बंगाल भी सूची में आगे

    एसआईआर के दौरान जिन राज्यों में बड़ी संख्या में नाम हटे हैं, उनमें—

    • तमिलनाडु: 97.37 लाख
    • गुजरात: 73.73 लाख
    • पश्चिम बंगाल: 58.20 लाख
    • मध्य प्रदेश: 42.74 लाख
    • राजस्थान: 41.85 लाख
    • छत्तीसगढ़: 27.34 लाख
    • केरल: 24 लाख

    मतदाता मृत, स्थानांतरित, अनुपस्थित या दोहरे पाए गए हैं। इन आंकड़ों ने राज्यों की चुनावी सूची की वास्तविक स्थिति को उजागर कर दिया है।


    गलती से नाम कटा या जुड़ा? मिलेगा सुधार का मौका

    चुनाव आयोग ने साफ किया है कि यदि किसी मतदाता का नाम गलती से कट गया हो या गलत तरीके से जुड़ गया हो, तो वह दावे-आपत्ति दर्ज करा सकता है।
    जिन 11 राज्यों में मसौदा सूची जारी हो चुकी है, वहां 23 दिसंबर से 14 फरवरी तक दावे और आपत्तियों की सुनवाई तथा सत्यापन किया जाएगा।
    अंतिम मतदाता सूची 21 फरवरी को प्रकाशित होगी।


    आयोग की चेतावनी: और नाम हट सकते हैं

    आयोग से जुड़े सूत्रों के अनुसार, अभी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है।
    दावे-आपत्तियों और गणना फार्मों की जांच के बाद कुछ और मतदाताओं के नाम भी हटाए जा सकते हैं। फिलहाल मसौदा सूची में उन्हीं मतदाताओं को शामिल किया गया है, जिन्होंने SIR के दौरान गणना फार्म भरकर भाग लिया है
    गौरतलब है कि SIR शुरू होने से पहले इन 12 राज्यों में कुल मतदाता संख्या लगभग 51 करोड़ थी।


    राजनीतिक दलों को सक्रिय रहने का निर्देश

    चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों से अपील की है कि वे दावे-आपत्तियों की प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाएं
    यदि किसी मतदाता का नाम गलत तरीके से जुड़ा या हटा हो, तो उसे बूथ लेवल एजेंट (BLA) के जरिए प्राथमिकता से उठाया जाए, ताकि अंतिम सूची पूरी तरह शुद्ध और निष्पक्ष हो।


    अब बाकी 23 राज्यों की बारी

    12 राज्यों में चल रहे SIR के साथ ही चुनाव आयोग ने देश के शेष 23 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में भी इस अभियान की तैयारी शुरू कर दी है।
    इनमें ओडिशा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू-कश्मीर, तेलंगाना, झारखंड और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख राज्य शामिल हैं।
    यहां बूथ लेवल ऑफिसरों (BLO) को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।


    पूरे देश में इसी साल पूरा होगा SIR

    सूत्रों के मुताबिक, 12 राज्यों में SIR का काम पूरा होते ही आयोग बाकी राज्यों में भी इसकी औपचारिक घोषणा कर देगा।
    चुनाव आयोग का लक्ष्य इसी साल देशभर में मतदाता सूची का विशेष सघन पुनरीक्षण पूरा करना है। उल्लेखनीय है कि इस अभियान की शुरुआत बिहार से की गई थी।


    क्यों अहम है यह प्रक्रिया

    साढ़े छह करोड़ नामों का हटना बताता है कि चुनाव आयोग फर्जी, दोहरे और निष्क्रिय मतदाताओं को सूची से बाहर कर चुनावी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना चाहता है। आने वाले चुनावों से पहले यह कदम लोकतंत्र की मजबूती की दिशा में बेहद अहम माना जा रहा है।

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