अरवल जिले के करपी थाना क्षेत्र अंतर्गत आईयरा गांव की एक नाबालिग लड़की पिछले पांच दिनों से लापता है। परिजन लगातार दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं, लेकिन अब तक पुलिस स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
लड़की की मां ने बताया कि वह सबसे पहले करपी थाना पहुंची थीं, लेकिन उन्हें आवेदन लिखना नहीं आता था। किसी व्यक्ति ने उन्हें सलाह दी कि वे अरवल पुलिस अधीक्षक कार्यालय जाएं। वहां पहुंचकर उन्होंने कार्यालय के बाहर मौजूद लोगों से आवेदन लिखवाया, परंतु इसके बाद भी थाना स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
पीड़िता की मां का आरोप है कि जब उन्होंने थाना में फोन कर जानकारी लेनी चाही तो उन्हें होली के बाद आने की बात कही गई। मां ने यह भी बताया कि उन्हें इस बात की जानकारी है कि उनकी बेटी किस लड़के के साथ गई है, फिर भी पुलिस की ओर से कोई पहल नहीं की गई।
मां ने आशंका जताई कि यदि उनकी बेटी के साथ कोई अनहोनी हो जाती है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा। उन्होंने कहा कि नाबालिग के मामले में पुलिस को तत्काल कार्रवाई का स्पष्ट निर्देश है, बावजूद इसके अब तक उदासीनता समझ से परे है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी फरियादी को आवेदन लिखना नहीं आता, तो क्या संबंधित थाना प्रभारी की यह जिम्मेदारी नहीं बनती कि वे अपने कर्मियों से आवेदन लिखवाकर उसे स्वीकार करें? इस पूरे मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।

