अरवल। जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के अरवल जिला अध्यक्ष पद के संगठनात्मक चुनाव को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। 1 मार्च 2026 को हुए चुनाव के दौरान उत्पन्न तनाव और मतदाताओं के बीच झगड़े की सूचना के बाद चुनाव परिणाम को “विवादित” घोषित कर दिया गया है। इस संबंध में बिहार प्रदेश जदयू सांगठनिक निर्वाचन 2026 के तहत पटना स्थित प्रदेश कार्यालय से राज्य निर्वाचन पदाधिकारी द्वारा पत्रांक संख्या 2/2026 जारी किया गया है।
जारी पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि चुनाव के दौरान व्यापक विवाद की सूचना मिलने के कारण पूरे प्रकरण की सघन जांच आवश्यक है। साथ ही समयाभाव के कारण प्रदेश अध्यक्ष के निर्वाचन से पूर्व जांच संभव नहीं होने की बात कही गई है। प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के बाद ही अरवल जिला अध्यक्ष पद के परिणाम को वैध अथवा अवैध घोषित करने का निर्णय लिया जाएगा।
इस बीच वर्तमान जिला अध्यक्ष को कार्यकारी जिला अध्यक्ष के रूप में अधिसूचित किया गया है, ताकि अंतिम निर्णय तक संगठनात्मक कार्य सुचारु रूप से चलते रहें।
सूत्रों के अनुसार प्रदेश नेतृत्व द्वारा सर्वसम्मति से चयन का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद सीमित उपस्थिति में मतदान कर प्रमाण पत्र जारी किए जाने की चर्चा से जिला निर्वाचन पदाधिकारी की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। चुनाव के दौरान जाति विशेष के नाम पर दबाव बनाने और धमकी देने जैसी बातें भी सामने आई हैं। 1 मार्च को बना तनावपूर्ण माहौल वीडियो साक्ष्यों में भी देखा गया, जिससे स्थिति काफी संवेदनशील हो गई थी।
जदयू के जिला प्रवक्ता चांद मलिक ने प्रदेश नेतृत्व से स्वतंत्र जांच टीम गठित कर निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि संगठन की एकता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शी जांच जरूरी है।
गौरतलब है कि जदयू को मुख्यमंत्री के नेतृत्व में एक अनुशासित और समावेशी दल के रूप में जाना जाता है। ऐसे में अब सभी की नजरें प्रदेश नेतृत्व के अंतिम फैसले पर टिकी हैं।

