ATM ग्लू से क्रिप्टो तक: बिहार में 55 करोड़ की ठगी, विदेशी कनेक्शन उजागर
पटना से चला, पूरे बिहार में फैला ठगी का जाल
बिहार की राजधानी पटना से एक ऐसा सनसनीखेज साइबर और एटीएम ठगी गिरोह सामने आया है, जिसने पुलिस महकमे के साथ-साथ आम लोगों को भी चौंका दिया है। पटना पुलिस ने एक बड़े अंतरजिला गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए 55 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन के ठोस सबूत जुटाए हैं। यह गिरोह पटना, गया, मुजफ्फरपुर, वैशाली और बेतिया समेत कई जिलों में सक्रिय था और ठगी के लिए बेहद शातिर तरीके अपना रहा था।
ATM में ग्लू, गेमिंग ऐप और बैंक खातों का खेल
एसएसपी कार्तिकेय के शर्मा के अनुसार, यह गिरोह दो प्रमुख तरीकों से लोगों को अपना शिकार बनाता था।
पहला तरीका – ATM मशीनों में ग्लू लगाकर लोगों के कार्ड फंसा देना। गिरोह के सदस्य ATM के आसपास खड़े रहते थे और जैसे ही किसी का कार्ड अटकता, मदद के नाम पर पिन खुद डलवा लेते थे। इसके बाद उसी कार्ड से ऑनलाइन ट्रांजेक्शन कर खाते साफ कर दिए जाते थे।
दूसरा तरीका – ऑनलाइन गेमिंग ऐप के जरिए ठगी। गेमिंग के नाम पर लोगों को जोड़ा जाता और फिर बैंक खातों से करोड़ों रुपये इधर-उधर किए जाते थे।
55 करोड़ के लेनदेन, विदेशी फंडिंग के सबूत
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह से जुड़े अलग-अलग बैंक खातों में अब तक करीब 55 करोड़ रुपये का लेनदेन हुआ है। हैरान करने वाली बात यह है कि इन खातों में बांग्लादेश और पाकिस्तान से भी पैसे भेजे जाने के सबूत मिले हैं।
इतना ही नहीं, क्रिप्टोकरेंसी में लेनदेन के भी ठोस साक्ष्य हाथ लगे हैं। मामला अंतरराष्ट्रीय स्तर तक जुड़ने के बाद इसकी जानकारी केंद्रीय एजेंसियों को दे दी गई है।
छापेमारी में क्या-क्या बरामद हुआ
पुलिस ने इस गिरोह के 13 शातिर सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से जो सामान बरामद हुआ है, वह गिरोह की गहराई और नेटवर्क को दिखाता है।
बरामदगी में शामिल हैं—
- विभिन्न बैंकों के 55 एटीएम कार्ड
- 11 पासबुक
- 28 चेकबुक और 2 ब्लैंक चेक
- 23 मोबाइल फोन
- 5 सिम कार्ड
- 2 कार
- 1 पासपोर्ट
- नकद 5900 रुपये
बेतिया का सौरभ निकला मास्टरमाइंड
इस पूरे ठगी नेटवर्क का मास्टरमाइंड पश्चिम चंपारण (बेतिया) का रहने वाला सौरभ द्विवेदी निकला है। सौरभ पहले सूरत की एक निजी कंपनी में काम करता था। लॉकडाउन के दौरान वह अपने घर लौटा और यहीं से ठगी की दुनिया में उतर गया।
बाद में उसने पटना और गया के शातिर अपराधियों से संपर्क किया और पूरे नेटवर्क को खड़ा कर दिया।
बैंककर्मी और इंजीनियर भी शामिल
जांच में यह भी सामने आया है कि इस गिरोह में तीन बैंककर्मी, एक निजी कंपनी का इंजीनियर और कई बैंक एजेंट शामिल थे।
बैंक एजेंट नए खाते खुलवाते थे और उन्हीं खातों में ठगी की रकम मंगाई जाती थी। फिर उसी पैसे को क्रिप्टोकरेंसी या दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता था।
सूरत से पटना तक बना नेटवर्क
पुलिस के अनुसार, सूरत से लौटने के बाद सौरभ की मुलाकात पटना के सत्यम कुमार से हुई, जो एक कंप्यूटर इंजीनियर है। यहीं से गिरोह को तकनीकी मजबूती मिली।
इसके बाद अलग-अलग जिलों में एजेंटों और शातिरों को जोड़कर एक संगठित नेटवर्क खड़ा किया गया।
इन बदमाशों की हुई गिरफ्तारी
गिरफ्तार आरोपियों में शामिल हैं—
- गया: मोहम्मद आमिर, मोहम्मद बकार, मोहम्मद जाहिद एहसान
- गया/पटना: नवनीत कुमार उर्फ सौरभ, सोनू कुमार, सुजीत कुमार, प्रभात रंजन कौतूक
- पटना: मोहम्मद खुशाम (फुलवारीशरीफ), विशाल कुमार (बेउर)
- वैशाली: राहुल कुमार
- मुजफ्फरपुर: सत्यम कुमार
- पश्चिम चंपारण: सौरभ द्विवेदी
भोजपुरी लेखक की किडनैपिंग से खुला राज
इस पूरे मामले का खुलासा एक चौंकाने वाली घटना से हुआ। 1 जुलाई की रात भोजपुरी फिल्मों के लेखक अशोक कुमार का अपहरण कर लिया गया।
उन्हें दीघा इलाके के पास बंधक बनाकर बेरहमी से पीटा गया, सोने की चेन और नकदी लूटी गई। इसके बाद बदमाशों ने ऑनलाइन स्कैनर से 9 हजार रुपये ट्रांसफर करवाए और छोड़ दिया।
यही ऑनलाइन ट्रांजेक्शन पुलिस के लिए सबसे बड़ा सुराग बना।
अभी और बड़े खुलासों की उम्मीद
गर्दनीबाग थाना पुलिस की जांच में पता चला कि गिरोह का नेटवर्क काफी बड़ा है और बिहार के कई शहरों में सक्रिय है। गिरफ्तार आरोपियों की निशानदेही पर 8 अन्य बदमाशों को भी दबोचा गया है।
पुलिस का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े नाम और कड़ियां सामने आ सकती हैं।
सवालों के घेरे में बैंकिंग सुरक्षा
ATM, बैंक और डिजिटल लेनदेन की सुरक्षा को लेकर यह मामला गंभीर चेतावनी है। पुलिस अब न सिर्फ गिरोह पर, बल्कि इसमें शामिल बैंक कर्मचारियों की भूमिका पर भी सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
बिहार में यह अब तक का सबसे बड़ा ATM और साइबर ठगी नेटवर्क माना जा रहा है, जिसने सिस्टम की कमजोरियों को उजागर कर दिया है।