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थाईलैंड–कंबोडिया सीमा पर फिर भड़का युद्ध, अमेरिकी मध्यस्थता में हुआ सीजफायर 45 दिन भी नहीं चला

नई दिल्ली। दक्षिण-पूर्व एशिया में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। थाईलैंड और कंबोडिया के बीच महीनों से जारी सीमा विवाद सोमवार को नए युद्ध में तब बदल गया जब थाईलैंड ने कंबोडियाई इलाकों पर एयर स्ट्राइक की पुष्टि की। यह कार्रवाई उस समय हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता में हुआ ताज़ा सीजफायर अभी 45 दिन भी पूरा नहीं हुआ था।

थाई सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल विंथाई सुवारी के अनुसार, सोमवार तड़के कंबोडियाई सैनिकों ने उबोन रत्चाथानी प्रांत के नाम युएन जिले के चोंग आन मा इलाके में छोटे हथियारों और इनडायरेक्ट-फायर हथियारों से हमला किया। इसके जवाब में थाईलैंड ने हवाई ताकत का इस्तेमाल किया और सीमा के पास एयर स्ट्राइक की। थाईलैंड ने F-16 लड़ाकू विमान भी सीमा पर तैनात कर दिए हैं।

झड़पों में एक सैनिक की मौत, चार घायल

थाई सेना ने पुष्टि की है कि नई झड़पों में एक थाई सैनिक की मौत हो गई और चार सैनिक घायल हुए हैं। उबोन रत्चाथानी और सी सा केट प्रांतों में लगातार गोलीबारी और तोपखाने की आवाजें सुनाई दीं। रविवार शाम ही कंबोडियाई सैनिकों ने कथित तौर पर फू फा लेक-प्लान हिन पैट कोन इलाके में हमला किया था, जिसके बाद तनाव लगातार बढ़ रहा था।

कंबोडिया का आरोप: थाईलैंड ने किया "क्रूर और अमानवीय हमला"

कंबोडिया के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय ने थाई सेना पर प्रेह विहार प्रांत में “क्रूर और अमानवीय” हमलों का आरोप लगाया है। कंबोडियाई सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल मैली सोचियाटा ने बताया कि सोमवार सुबह करीब 5:04 बजे हमले शुरू हुए। कंबोडिया का दावा है कि थाई सेना ने तैमोन थोम मंदिर, प्रीह विहार मंदिर के पास 5 मकारा क्षेत्र और चोमका चेक पर टैंक गोले दागे। कंबोडिया ने इन हमलों को “कई दिनों की उकसावे की कार्रवाई के बाद किया गया समन्वित हमला” बताया।

कंबोडिया का कहना है कि उसने जवाबी कार्रवाई नहीं की और “अधिकतम संयम” बरतते हुए अंतरराष्ट्रीय समझौतों का पालन किया।

ट्रंप की मध्यस्थता से हुआ था सीजफायर

यह संघर्ष जुलाई 2025 में तीव्र हुआ था और पांच दिनों तक युद्ध जैसी स्थिति बनी रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मलेशियाई प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम की मध्यस्थता से 28 जुलाई को सीजफायर लागू हुआ। 26 अक्टूबर 2025 को कुआलालंपुर में एक बड़े समझौते पर हस्ताक्षर भी किए गए थे, जिसमें ट्रंप स्वयं मौजूद थे।

लेकिन यह युद्धविराम दो महीने भी नहीं टिक पाया और अब फिर से सीमा पर लड़ाई भड़क उठी है।

एशिया में बढ़ते तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने दोनों देशों से संयम बरतने और वार्ता बहाल करने की अपील की है।

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