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SEBI का बड़ा एक्शन: Prabhudas Lilladher पर 7 दिन का प्रतिबंध, जांच में कई गंभीर गड़बड़ियां उजागर


मार्केट रेगुलेटर SEBI ने ब्रोकरेज फर्म Prabhudas Lilladher के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी को सात दिनों तक नए क्लाइंट जोड़ने, नए कॉन्ट्रैक्ट साइन करने और नई स्कीमें लॉन्च करने से रोक दिया है। यह कदम 2 से 8 नवंबर 2022 के बीच SEBI, NSE और BSE द्वारा की गई संयुक्त जांच के बाद उठाया गया, जिसमें कई गंभीर अनियमितताएँ सामने आईं। वित्तीय बाजार की चौखट पर यह मामला ऐसे गूंजा, जैसे किसी पुरानी तिजोरी में छिपे धूल भरे रिकॉर्ड अचानक उजाले में आ जाएँ।

जांच में पाया गया कि कंपनी ने क्लाइंट फंड का गलत इस्तेमाल किया, मार्जिन की गलत रिपोर्टिंग की और अधूरी जानकारियाँ स्टॉक एक्सचेंजों को भेजीं। इसके अलावा ट्रेड सेटलमेंट नियमों का उल्लंघन और मार्जिन की गलत गणना जैसी खामियाँ भी दर्ज की गईं। ये गड़बड़ियाँ 1 अप्रैल 2021 से 31 अक्टूबर 2022 के बीच सामने आईं। तथ्यों की यह लंबी सूची दर्शाती है कि व्यवस्थित कंप्लायंस की जगह प्रक्रियाएँ ढुलमुल तरीके से चलाई जा रही थीं।

SEBI ने 28 दिसंबर 2023 को एक Designated Authority (DA) को जांच आगे बढ़ाने का निर्देश दिया था। DA ने कंपनी पर 15 दिनों के प्रतिबंध की सिफारिश की, हालांकि SEBI ने इसे घटाकर सात दिन कर दिया। कंपनी ने अपने पक्ष में दलील दी कि ये ‘तकनीकी गलतियाँ’ थीं और किसी भी तरह की मंशा गलत नहीं थी। लेकिन SEBI ने इस बचाव को स्वीकार नहीं किया। दिलचस्प यह भी है कि जांच अवधि में ग्राहकों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली—शायद इसलिए कि वे इन गलतियों से पूरी तरह अनजान थे।

अन्य खामियों में KRA दस्तावेजों को देर से अपलोड करना, क्लाइंट फंड की सही जानकारी एक्सचेंज सिस्टम पर न देना, एक्सपोजर की गलत रिपोर्टिंग और लेजर बैलेंस में ग़लत सूचनाएँ शामिल हैं। साथ ही, चार क्लाइंट्स से ज़रूरत से अधिक ब्रोकरेज वसूला गया और दो डिमैट अकाउंट निर्धारित समयसीमा के बाद भी सक्रिय पाए गए।

SEBI की यह कार्रवाई बाज़ार में एक स्पष्ट संदेश छोड़ती है—पारदर्शिता और नियम पालन की अनदेखी अब आसानी से नहीं छोड़ी जाएगी।


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