नोएडा। ग्रेटर नोएडा की गौर सिटी से सामने आई एक मार्मिक कहानी इन दिनों सोशल मीडिया पर तेज़ी से फैल रही है। यह कहानी एक आईटी इंजीनियर की है, जिसकी ज़िंदगी अचानक पटरी से उतर गई और उसे मजबूरी में रैपिडो राइडर बनकर घर चलाने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। इस कहानी को कंटेंट क्रिएटर नोमैडिक तेजू ने एक इंस्टाग्राम पोस्ट और वीडियो के ज़रिये शेयर किया है, जो देखते ही देखते पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया।
आईटी सेक्टर की सुस्ती ने बदली जिंदगी
तेजू की पोस्ट के अनुसार, उनका दोस्त ग्रेटर नोएडा की गौर सिटी में रहता था। बेहतर करियर और सैलरी की उम्मीद में उसने अपनी पुरानी नौकरी छोड़ दी थी। लेकिन तभी आईटी सेक्टर में हायरिंग की रफ्तार अचानक धीमी हो गई। बाजार में नौकरियां न होने के कारण उसके लिए नई नौकरी पाना मुश्किल हो गया। गौर सिटी जैसे महंगे आवासीय क्षेत्र में फ्लैट की EMI, 30–35 हजार रुपये का किराया और अन्य खर्च उसके लिए असहनीय होने लगे।
दो महीने तक लगातार प्रयासों के बाद भी जब उसे नौकरी नहीं मिली, तो उसे अपना फ्लैट किराए पर देना पड़ा। परिवार को गांव भेजना पड़ा और खुद पास के एक छोटे से कमरे में रहने लगा। EMI, खर्चों और जिम्मेदारियों के बीच फंसे इंजीनियर ने आखिरकार रैपिडो बाइक टैक्सी चलाना शुरू किया। वह बीच-बीच में फ्रीलांसिंग भी करता है ताकि किसी तरह परिवार का खर्च चल सके।
वायरल वीडियो, बढ़ती चिंता
नोमैडिक तेजू ने यह वीडियो गौर सिटी के बाहर शूट किया। वीडियो में वह दोस्त की हालात बताते हुए भावुक दिखाई दिए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुआ और टेक सेक्टर में AI, हायरिंग फ्रीज और नौकरी असुरक्षा को लेकर बड़ी बहस छिड़ गई।
कई यूजर्स ने कहा कि आज की "फेक लाइफस्टाइल" मध्यम वर्ग को बर्बादी की ओर ले जा रही है। कुछ ने लिखा कि आईटी सेक्टर में नौकरी मिलना इसलिए मुश्किल हो रहा है क्योंकि लोग स्किल नहीं बढ़ा रहे—केवल GPT से कोड कॉपी करने से इंटरव्यू पास नहीं होते। वहीं कुछ यूजर्स ने चेतावनी दी कि अगले 5 साल में AI कई नौकरियों को और निगल सकता है।
AI और छंटनियों का दबाव
टेक इंडस्ट्री पिछले 2–3 वर्षों से हायरिंग में भारी गिरावट झेल रही है। बड़े स्तर पर छंटनियां, AI पर बढ़ती निर्भरता, आउटसोर्सिंग में कमी—ये सब कारण इंजीनियरों की नौकरी असुरक्षा को बढ़ा रहे हैं। तेजू की यह वायरल पोस्ट उसी संघर्ष का प्रतीक बन गई है, जिससे हजारों इंजीनियर रोज़ गुजर रहे हैं।
यह कहानी आज के समय में मध्यम वर्ग के सपनों, जिम्मेदारियों और बदलते टेक लैंडस्केप की कठोर सच्चाई को उजागर करती है।
