वॉशिंगटन/नई दिल्ली। भारत की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध नेटवर्क पर बड़ी चोट करते हुए अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले अवैध कॉल सेंटर्स का भंडाफोड़ किया है। इस संयुक्त ऑपरेशन में CBI ने अमेरिका की विभिन्न कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर काम किया और कई संदिग्धों को धर दबोचा। इस कार्रवाई की अमेरिका ने खुले मंच पर सराहना की है और भारतीय एजेंसी का विशेष धन्यवाद किया है।
अमेरिकी नागरिकों को कर रहे थे निशाना
इन फर्जी कॉल सेंटर्स पर आरोप है कि ये संगठित गिरोह अमेरिकी नागरिकों के डेटा चुराकर फर्जी टेक सपोर्ट, IRS कॉल और ऑनलाइन स्कैम के जरिए लाखों रुपये की ठगी कर रहा था। खुफिया एजेंसियों को काफी समय से इस नेटवर्क की गतिविधियों की जानकारी मिल रही थी। साइबर फ्रॉड की बढ़ती शिकायतों के बाद CBI ने गुप्त रूप से ऑपरेशन शुरू किया और अवैध नेटवर्क के मास्टरमाइंड विकास कुमार निमर को गिरफ्तार कर लिया।
कैसे हुआ गिरोह का पर्दाफाश
विकास पिछले कई वर्षों से अलग-अलग शहरों में फर्जी कॉल सेंटर संचालित कर रहा था। उसकी टीम को विशेष सॉफ्टवेयर और लैपटॉप देकर अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने की ट्रेनिंग दी जाती थी। सितंबर 2024 में दर्ज एक केस की जांच करते हुए CBI ने पुणे, हैदराबाद और विशाखापट्टनम में छापेमारी की, जहाँ चार अवैध कॉल सेंटर्स पकड़े गए। विकास के घर से भी कई डिजिटल उपकरण, पासपोर्ट, डेटा-बेस और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
CBI की गिरफ्तारी और छापेमारी के बाद फर्जी नेटवर्क का लगभग पूरा ढांचा ढह गया है।
अमेरिका ने की खुलकर तारीफ
संयुक्त मिशन की सफलता के बाद अमेरिकी एजेंसी ने सोशल मीडिया पर CBI के लिए धन्यवाद संदेश जारी किया। पोस्ट में कहा गया—
“भारत की CBI ने अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाने वाले संगठित साइबर नेटवर्क को ध्वस्त किया है। समन्वित कार्रवाई और खुफिया जानकारी साझा करने से दोनों देशों ने मिलकर भविष्य के घोटालों को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।”
भारत–अमेरिका सहयोग की मिसाल
यह संयुक्त अभियान दोनों देशों के बीच साइबर सुरक्षा सहयोग की एक मजबूत मिसाल माना जा रहा है। उद्देश्य स्पष्ट है—अंतरराष्ट्रीय अपराधियों के नेटवर्क को खत्म करना, ऑनलाइन ठगी पर रोक लगाना और दोनों देशों के नागरिकों की सुरक्षा बढ़ाना।
