बच्चों ने सीखी पारंपरिक कला की बारीकियाँ, डीपीएस अरवल में शिल्प प्रशिक्षण को मिला उत्साह

Satveer Singh
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अरवल। दिल्ली पब्लिक स्कूल के प्रांगण में इन दिनों रंगों, आकृतियों और पारंपरिक कला की सुगंध से भरा हुआ है। मंगलवार को यहां कार्यालय विकास आयुक्त (हस्तशिल्प), वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार के हस्तशिल्प सेवा केंद्र, पटना द्वारा आयोजित तीन दिवसीय शिल्प प्रदर्शन सह जागरूकता कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ। यह कार्यक्रम 25 से 27 नवंबर 2025 तक चलेगा, जिसका उद्देश्य बच्चों को भारतीय पारंपरिक शिल्पों से जोड़ना और उनकी सांस्कृतिक समझ को समृद्ध करना है।

कार्यक्रम का उद्घाटन डीपीएस अरवल के प्राचार्य धर्मेंद्र कुमार और हस्तशिल्प सेवा केंद्र, पटना के अधिकारी अमित मिश्रा ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। प्राचार्य ने कहा कि भारतीय शिल्प केवल कला नहीं बल्कि हमारी सांस्कृतिक विरासत का जीवंत दस्तावेज हैं। ऐसे आयोजनों से बच्चों में रचनात्मकता विकसित होती है और वे अपनी जड़ों को समझने लगते हैं।

प्रशिक्षण के लिए पटना से चार विशेषज्ञ शिल्पकार विद्यालय पहुंचे हैं—एपिलिक शिल्प में नीतू देवी, टीकूली पेंटिंग की विशेषज्ञ नाहिदा बनो, मिथिला चित्रकला की कलाकार सुजाता कुमारी और सूजनी शिल्प की प्रशिक्षक नीतू देवी। ये सभी प्रशिक्षक बच्चों को न केवल तकनीकी प्रक्रिया सिखा रहे हैं, बल्कि हर कला के पीछे छिपी परंपराओं, कहानियों और ऐतिहासिक महत्व से भी परिचित करा रहे हैं।

पहले ही दिन छात्रों ने उत्साहपूर्वक विभिन्न शिल्प विधाओं में भाग लिया। किसी ने रंगों को आकार दिया, तो किसी ने धागों और कपड़ों में कल्पनाएं पिरोईं। विद्यालय परिसर छोटे-छोटे कला केंद्रों में बदल गया, जहाँ बच्चे प्रत्यक्ष अभ्यास के माध्यम से अपनी सृजनशीलता को नए आयाम देते दिखे।

तीन दिनों तक चलने वाले इस कार्यक्रम में लाइव डेमो, प्रैक्टिकल गतिविधियाँ, और शिल्प प्रदर्शनी शामिल हैं। आयोजन का लक्ष्य छात्रों में कला के प्रति रुचि जगाना और उन्हें भारतीय हस्तशिल्प की विविधता से रूबरू कराना है। विद्यालय प्रशासन ने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे कार्यक्रम बच्चों को कौशल, समझ और सांस्कृतिक संवेदनशीलता—तीनों से समृद्ध करते हैं।
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