पटना। बिहार में संगठित अपराध के खिलाफ राज्य सरकार ने अब तक का सबसे व्यापक और सख्त अभियान शुरू कर दिया है। नई सरकार के गठन के तुरंत बाद डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी की अगुवाई में तैयार किए गए इस एक्शन प्लान का लक्ष्य है—माफिया नेटवर्क को जड़ से उखाड़ना। सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अब अपराधियों को न तो राजनीतिक संरक्षण मिलेगा, न ही अवैध कमाई के सहारे वे बच निकलेंगे।
डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि अभियान के पहले चरण में 400 कुख्यात अपराधियों की संपत्तियाँ जब्त की गई थीं। अब दूसरे चरण में 1200–1300 और अपराधियों की पहचान कर ली गई है, जिनकी अवैध संपत्तियों पर जल्द ही बुलडोजर चलाया जाएगा। इस सूची में रेत (बालू) माफिया, भूमि माफिया, अवैध शराब के कारोबारी, संगठित गिरोह, कॉन्ट्रैक्ट किलर्स और आर्थिक अपराध से जुड़े नेटवर्क शामिल हैं। गृह मंत्री के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठक में तय किया गया कि जिस जमीन या संपत्ति पर अपराध की छाया होगी, उसे राज्य सरकार बर्दाश्त नहीं करेगी।
पुलिस और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) को संयुक्त अभियान चलाने का निर्देश दिया गया है। राजधानी पटना सहित कई जिलों में सरकारी जमीनों से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तेज कर दी गई है, जहां बुलडोजर एक्शन लगातार जारी है।
सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा को शीर्ष प्राथमिकता में रखा है। इसी के तहत एंटी-रोमियो स्क्वॉड को पूरी तरह सक्रिय किया जा रहा है। स्कूल-कॉलेजों के बाहर महिला सुरक्षा बल की विशेष तैनाती होगी। इस उद्देश्य से राज्य सरकार 2000 नई स्कूटी खरीद रही है, जिन पर तैनात महिला पुलिसकर्मी भीड़भाड़ वाले स्थानों और छात्राओं के मार्गों पर नियमित गश्त करेंगी। छेड़खानी, पीछा करने या किसी भी शिकायत पर तुरंत कार्रवाई होगी।
डीजीपी ने कहा कि संगठित अपराध और महिलाओं के खिलाफ अपराध पर “जीरो टॉलरेंस” नीति लागू रहेगी। आने वाले दिनों में कई बड़े माफिया गिरोहों पर बड़ी कार्रवाई देखने को मिल सकती है। बिहार में कानून का पहरा अब और कठोर होने जा रहा है।
