26 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद हवलदार मनोज कुमार का दानापुर में भव्य स्वागत, बोले— "वर्दी उतर सकती है, देशभक्ति नहीं"
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26 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद हवलदार मनोज कुमार का दानापुर में भव्य स्वागत, बोले— "वर्दी उतर सकती है, देशभक्ति नहीं"


26 वर्षों की गौरवशाली सेवा के बाद हवलदार मनोज कुमार का दानापुर में भव्य स्वागत, बोले— "वर्दी उतर सकती है, देशभक्ति नहीं"

दानापुर/अरवल: भारतीय सेना में 26 वर्षों तक देश की सेवा करने के बाद सेवानिवृत्त होकर लौटे हवलदार मनोज कुमार का गुरुवार सुबह दानापुर रेलवे स्टेशन पर भव्य स्वागत किया गया। अरवल से पहुंचे सामाजिक कार्यकर्ताओं, युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने तिरंगा, फूल-मालाओं और अंगवस्त्र के साथ उनका अभिनंदन किया। इस दौरान पूरे स्टेशन परिसर में "भारत माता की जय" और "हवलदार मनोज कुमार जिंदाबाद" के नारे गूंजते रहे।

हवलदार मनोज कुमार भारतीय सेना की 19 डिवीजन की DAGGER K9 यूनिट में डॉग मास्टर के रूप में कार्यरत थे। उनकी तैनाती जम्मू-कश्मीर के संवेदनशील बारामुला क्षेत्र में रही, जहां उन्होंने खोजी कुत्तों के साथ अनेक सैन्य अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी K9 टीम ने विस्फोटक सामग्री (IED), हथियारों और घुसपैठियों का पता लगाने जैसे कई चुनौतीपूर्ण अभियानों में योगदान दिया।

सेना से सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्त होने के बाद वह जम्मू मेल से गुरुवार सुबह करीब 4 बजे दानापुर रेलवे स्टेशन पहुंचे। वर्दी में सजे मेडल और सैन्य गरिमा के साथ जैसे ही वह प्लेटफॉर्म पर उतरे, उपस्थित लोगों ने तालियों और नारों के बीच उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।

स्वागत करने वालों में रवि कुमार, सौरभ कुमार, सूरज कुमार, राकेश कुमार, प्रीतम कुमार सहित अरवल के कई समाजसेवी और नागरिक शामिल थे। सभी ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर और अंगवस्त्र भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर हवलदार मनोज कुमार ने कहा, "19 डिवीजन की DAGGER K9 यूनिट मेरी पहचान रही है। बारामुला की कठिन परिस्थितियों में मेरे साथी खोजी कुत्तों ने हर अभियान में साहस और निष्ठा का परिचय दिया। 26 वर्ष पहले देश सेवा की जो शपथ ली थी, उसे पूरी ईमानदारी से निभाकर लौट रहा हूं। वर्दी उतर सकती है, लेकिन देशभक्ति कभी नहीं उतरती। अब मेरा प्रयास रहेगा कि गांव के अधिक से अधिक युवाओं को भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करूं।"

घर वापसी के इस भावुक अवसर पर उनके परिवार की आंखें भी नम दिखीं। उनकी मां और पत्नी ने कहा कि वर्षों तक हर दिन उनकी सुरक्षित वापसी की दुआ करती थीं। आज उन्हें गर्व है कि उनका बेटा और परिवार का सदस्य सम्मान के साथ देश सेवा पूरी कर घर लौटा है।

हवलदार मनोज कुमार की यह वापसी केवल एक सैनिक की सेवानिवृत्ति नहीं, बल्कि देश सेवा, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की प्रेरक मिसाल के रूप में देखी जा रही है। उनके सम्मान में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रतीक है कि समाज अपने वीर सैनिकों के योगदान को हमेशा सम्मान और गर्व के साथ याद रखता है।

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