सड़क दुर्घटनाएं आज के समय में एक गंभीर समस्या बनती जा रही हैं। ऐसे में हादसे के तुरंत बाद सही कदम उठाना किसी भी घायल व्यक्ति की जान बचा सकता है। इसी विषय पर चिकित्सक डॉ. विनीत कुमार रंजन ने ट्रॉमा या दुर्घटना प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है।
डॉ. रंजन के अनुसार, ट्रॉमा मैनेजमेंट का मतलब है गंभीर चोट लगने के तुरंत बाद सही प्राथमिक उपचार देना, ताकि मरीज की जान बचाई जा सके और आगे की जटिलताओं को कम किया जा सके।
उन्होंने बताया कि दुर्घटना स्थल पर सबसे पहले अपनी और घायल की सुरक्षा सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। अगर आसपास यातायात या आग जैसी कोई आशंका हो, तो उससे दूरी बनाकर सुरक्षित स्थान पर रहें।
घायल व्यक्ति के शरीर से खून बह रहा हो तो तुरंत साफ कपड़े से घाव पर दबाव डालकर रक्तस्राव रोकने की कोशिश करनी चाहिए। साथ ही यह भी जांचना चाहिए कि व्यक्ति सांस ले रहा है या नहीं।
डॉ. रंजन ने खासतौर पर चेतावनी दी कि अगर गर्दन या रीढ़ की हड्डी में चोट का संदेह हो, तो घायल को बिल्कुल भी हिलाना-डुलाना नहीं चाहिए, क्योंकि इससे स्थायी लकवा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि दुर्घटना के तुरंत बाद 102 या 108 एम्बुलेंस सेवा पर कॉल करना चाहिए, ताकि मरीज को जल्द से जल्द अस्पताल पहुंचाया जा सके।
अस्पताल में मरीज का इलाज विशेषज्ञ ट्रॉमा टीम द्वारा किया जाता है, जहां सबसे पहले उसकी स्थिति को स्थिर किया जाता है। इसके बाद CT स्कैन, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड जैसी जांचों से अंदरूनी चोटों का पता लगाया जाता है। जरूरत पड़ने पर तत्काल सर्जरी भी की जाती है और गंभीर मरीजों को ICU में रखा जाता है।
डॉ. रंजन ने यह भी बताया कि दुर्घटना के बाद मरीज मानसिक रूप से भी आहत हो सकता है। ऐसे में उसे शांत रखने और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग कराने की सलाह दी जाती है।
अंत में उन्होंने लोगों से अपील की कि घायल व्यक्ति को जबरदस्ती उठाने या बैठाने की कोशिश न करें और बिना डॉक्टर की सलाह के उसे कुछ भी खाने-पीने को न दें।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आम लोग इन बुनियादी बातों का ध्यान रखें, तो सड़क दुर्घटनाओं में कई कीमती जानें बचाई जा सकती हैं।

