अरवल। देशव्यापी मजदूर हड़ताल के आह्वान पर गुरुवार को भाकपा-माले एवं संयुक्त वाम दलों के नेतृत्व में अरवल में सड़क जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार लेबर कोड का विरोध करते हुए इसे मजदूर विरोधी कानून बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता खेत एवं ग्रामीण मजदूर सभा के जिला सचिव उपेन्द्र पासवान ने की। सभा को राम दिनेश उर्फ त्यागी, उमेश ठाकुर, पंकज कुमार, विजय यादव, रामचन्द्र पाठक, अरुण कुमार, मोइन अंसारी, रविन्द्र यादव, सुऐब आलम एवं जितेन्द्र यादव सहित कई नेताओं ने संबोधित किया।
वक्ताओं ने कहा कि संविधान में मजदूरों के अधिकारों की रक्षा के लिए पहले 44 श्रम कानून थे, जिन्हें समाप्त कर केंद्र सरकार ने चार श्रम संहिताएं लागू कर दी हैं। उनका आरोप था कि यह कानून मजदूरों के अधिकारों को कमजोर कर कॉर्पोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के उद्देश्य से बनाए गए हैं। नेताओं ने कहा कि आठ घंटे कार्यदिवस के लिए मजदूरों ने लंबी लड़ाई लड़ी थी, लेकिन नए प्रावधानों के जरिए 12 घंटे काम लेने की व्यवस्था की जा रही है और फैक्ट्रियों में ट्रेड यूनियन बनाने के अधिकार को भी सीमित किया जा रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन के आह्वान पर यह हड़ताल आयोजित की गई है। उन्होंने बढ़ती महंगाई पर भी चिंता जताई और कहा कि मजदूरों को समय पर और उचित मजदूरी नहीं मिल रही है, जिससे उनका जीवन-यापन और स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
सभा में मनरेगा कानून में बदलाव का मुद्दा भी उठाया गया। नेताओं ने आरोप लगाया कि पहले मनरेगा के तहत करोड़ों मजदूरों को काम और बेरोजगारी भत्ता का प्रावधान था, लेकिन अब उसमें बदलाव कर मजदूरों के अधिकारों को कमजोर किया जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि मजदूर विरोधी नीतियों को वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
