अरवल। देशव्यापी आम मजदूर हड़ताल के आह्वान पर गुरुवार को आशा कार्यकर्ता संघ (संबंधित गोप गुट) की ओर से सिविल सर्जन कार्यालय का घेराव किया गया। इस दौरान आशा कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए चार श्रम कोड के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन करते हुए अपनी मांगों को बुलंद किया।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर जच्चा-बच्चा की देखभाल, टीकाकरण, विभिन्न बीमारियों की जानकारी और स्वास्थ्य सेवाओं से लोगों को जोड़ने का कार्य 24 घंटे करती हैं। इसके बावजूद उन्हें न तो नियमित मानदेय मिलता है और न ही सामाजिक सुरक्षा की कोई ठोस व्यवस्था है।
आशा बहनों ने आरोप लगाया कि महंगाई चरम पर है, लेकिन सरकार केवल आश्वासन देती रही है। बिहार चुनाव से पहले मानदेय बढ़ाने और नियमित भुगतान का वादा किया गया था, जो अब तक पूरा नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार ही महिलाओं के साथ अन्याय कर रही है।
प्रदर्शन के दौरान समुदाय स्वास्थ्य केंद्र कुर्था के प्रभारी पर आशा कार्यकर्ताओं के अपमान का भी आरोप लगाया गया। संघ की ओर से सिविल सर्जन से मांग की गई कि मामले की जांच कर तत्काल कुर्था प्रभारी को हटाया जाए।
सभा को सीपीएम के विजय यादव, भाकपा-माले के सुऐब आलम और रवीन्द्र यादव सहित कई नेताओं ने संबोधित किया। वहीं आशा कार्यकर्ता आशा देवी, कांति देवी, बिमल देवी, बिंदु कुमारी और माया देवी ने भी अपनी बातें रखीं और सरकार से न्याय की मांग की।
कार्यक्रम के अंत में संघ की ओर से चेतावनी दी गई कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
