अरवल। सदर अस्पताल में भर्ती मरीज इन दिनों मच्छरों के प्रकोप से परेशान हैं। अस्पताल के विभिन्न वार्डों में मरीजों को नियमित रूप से मच्छरदानी उपलब्ध नहीं कराई जा रही है, जिसके कारण रातभर मच्छरों के काटने से मरीजों और उनके परिजनों की नींद पूरी नहीं हो पा रही है। नींद पूरी नहीं होने से मरीजों की तबीयत और बिगड़ने की आशंका बनी रहती है।
गर्मी का मौसम शुरू होते ही मच्छरों की संख्या में तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसे में अस्पताल में भर्ती मरीजों को विशेष सुरक्षा की आवश्यकता होती है, लेकिन अस्पताल प्रबंधन की ओर से सभी वार्डों में मच्छरदानी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई है। मरीजों का कहना है कि मच्छरों के कारण रात में आराम करना मुश्किल हो जाता है, जिससे दवा का असर भी प्रभावित हो सकता है।
हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने प्रसव, सिजेरियन, पुरुष, महिला और इमरजेंसी वार्ड की खिड़कियों पर पतली जाली लगवाई है, लेकिन गेट खुलने और बंद होने के दौरान मच्छर अंदर प्रवेश कर जाते हैं। दिन में ये मच्छर वार्ड में छिपे रहते हैं और रात में मरीजों को परेशान करते हैं।
मरीज के परिजन रामबाबू और सोनू कुमार ने बताया कि डॉक्टर द्वारा बेहतर इलाज के बाद मरीजों को अच्छी नींद की जरूरत होती है, लेकिन मच्छरों के डंक से यहां के मरीज त्रस्त हैं। उन्होंने कहा कि अस्पताल परिसर और वार्डों की सफाई होने के बावजूद मच्छरों का प्रकोप कम नहीं हो रहा है।
रोजाना 35-40 मरीज होते हैं भर्ती
100 बेड वाले सदर अस्पताल में प्रतिदिन औसतन 35 से 40 मरीज इमरजेंसी और गायनी वार्ड में भर्ती होते हैं। वर्तमान में केवल डेंगू वार्ड और जले हुए मरीजों को ही मच्छरदानी उपलब्ध कराई जाती है। गाइनी वार्ड में भर्ती जच्चा-बच्चा को मच्छरदानी नहीं मिलने से विशेष परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में विभिन्न रोगों से ग्रसित मरीज भर्ती रहते हैं, ऐसे में मच्छरों के काटने से संक्रमण फैलने की आशंका भी बनी रहती है।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
इस संबंध में सदर अस्पताल प्रबंधक मो. रिजवान ने बताया कि डेंगू और जले हुए मरीजों को मच्छरदानी दी जाती है। अन्य वार्डों में यदि कोई मरीज मच्छरदानी की मांग करता है, तो उन्हें भी उपलब्ध कराया जाता है।
मरीजों और उनके परिजनों ने अस्पताल प्रशासन से सभी वार्डों में नियमित रूप से मच्छरदानी की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है, ताकि मरीजों को इलाज के साथ-साथ सुरक्षित और आरामदायक वातावरण भी मिल सके।
