अरवल, 13 फरवरी 2026: ऑल इंडिया फ़ोरम फॉर इक्विटी के आह्वान पर शुक्रवार को अरवल के स्वतंत्रता सेनानी पार्क में वंचित अधिकार दिवस के अवसर पर एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान छात्र-युवाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने शहीद पार्क से महावीर चौक तक समता मार्च निकालकर सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर आवाज बुलंद की।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सामाजिक न्याय आंदोलन (बिहार) के सचिव सुबोध यादव ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यूजीसी रेगुलेशन को रोहित एक्ट की तर्ज़ पर संसद से कानून बनाकर लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार राजनीतिक चाल के तहत यूजीसी रेगुलेशन का इस्तेमाल कर रही है और बहुजन समाज के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और न्यायपालिका में मनुवादी सोच का प्रभाव होने के कारण बहुजनों के 65 प्रतिशत आरक्षण को लागू होने से रोका जाता है, जबकि ईडब्ल्यूएस के 10 प्रतिशत आरक्षण को तुरंत लागू कर दिया जाता है।
उन्होंने मांग उठाई कि एससी, एसटी और ओबीसी के हित में बहुजन आरक्षण को संविधान की 9वीं अनुसूची में शामिल किया जाए तथा यूजीसी रेगुलेशन को संसद से कानून बनाकर लागू किया जाए। साथ ही उन्होंने कहा कि जाति जनगणना की गारंटी, सभी शिक्षण संस्थानों एवं न्यायपालिका में संख्यानुपात के आधार पर आरक्षण लागू करने और बैकलॉग पदों को भरने की दिशा में सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।
सभा में आइसा के नेता नीतीश कुमार ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 के जरिए शिक्षा को बाज़ार का माल बनाया जा रहा है, जिससे गरीब और वंचित तबके के बच्चे शिक्षा से दूर हो जाएंगे। उन्होंने इस नीति को रद्द करने की मांग की।
कार्यक्रम को माले नेता रविंद्र यादव, जितेंद्र यादव, शाह शाद, सूरज प्रताप, रितेश कुमार, राजद नेता रामेश्वर चौधरी और डॉ. ए.के. भारती सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया। वहीं मार्च और सभा में धर्मेंद्र यादव, मुकेश कुमार, शाह फ़राज़, सुनील कुमार, अरुण कुमार, मनोज यादव, सुदामा यादव, रामाकांत कुमार उर्फ टुन्ना शर्मा, शोएब नेता, अमिताभ कुमार, विवेक कुमार, संजीवन ठाकुर समेत बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए।
कार्यक्रम के अंत में उपस्थित लोगों ने संकल्प लिया कि बहुजन अधिकारों और सामाजिक न्याय की लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक जारी रखा जाएगा।
