“जनता दरबार बना उम्मीद की किरण” — डीएम अमृषा बैंस के जनता दरबार में 32 फरियादों पर त्वरित कार्रवाई, पीड़ित परिवारों को मिला भरोसा
अरवल। आम जनता की समस्याओं को सीधे सुनकर मौके पर समाधान करने की दिशा में अरवल जिला प्रशासन ने एक बार फिर भरोसे की मिसाल पेश की है। जिला पदाधिकारी अरवल श्रीमती अमृषा बैंस की अध्यक्षता में समाहरणालय सभा कक्ष में आयोजित जनता दरबार में कुल 32 परिवादों की सुनवाई की गई, जिनमें से अधिकांश मामलों का तत्काल या त्वरित समाधान किया गया। शेष मामलों में संबंधित विभागों को समयबद्ध और पारदर्शी कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
यह जनता दरबार न केवल प्रशासनिक जवाबदेही का उदाहरण बना, बल्कि उन लोगों के लिए भी राहत की सांस साबित हुआ, जो लंबे समय से न्याय और सहायता की आस लगाए बैठे थे।
जनता दरबार में किन समस्याओं की हुई सुनवाई
जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों और पंचायतों से आए फरियादियों ने अपनी समस्याएं रखीं। इन समस्याओं का दायरा काफी व्यापक रहा, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल थे—
- भूमि विवाद एवं जमाबंदी
- अतिक्रमण से जुड़े मामले
- नल-जल योजना की शिकायतें
- मजदूरी भुगतान में देरी
- दुर्घटना मुआवजा
- राजस्व एवं सहकारिता विभाग से जुड़े मामले
- बाल संरक्षण, शिक्षा एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाएं
- पंचायत राज, परिवहन एवं थाना स्तर की शिकायतें
जिला पदाधिकारी ने एक-एक फरियादी की बात गंभीरता से सुनी और संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि जनता की समस्याओं का समाधान टालमटोल के बिना किया जाए।
दुर्घटना में मृत व्यक्ति की पत्नी को न्याय की उम्मीद
जनता दरबार में सबसे भावुक मामला परासी थाना क्षेत्र के ग्राम रामपुर बैना की निवासी कमला देवी का रहा। उन्होंने बताया कि उनके पति स्व. रविंद्र शर्मा की लगभग डेढ़ वर्ष पूर्व एक वाहन दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी, लेकिन अब तक उन्हें दुर्घटना मुआवजा राशि नहीं मिल पाई है।
कमला देवी ने प्रशासन से गुहार लगाई कि मुआवजा राशि उपलब्ध कराई जाए ताकि परिवार का भरण-पोषण हो सके। इस पर डीएम अमृशा बैंस ने मामले को गंभीर मानते हुए अंचलाधिकारी अरवल को नियमानुसार तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
सड़क किनारे अतिक्रमण का मामला फिर उठा
किंजर थाना क्षेत्र के ग्राम पुरेनिया निवासी रामेश्वर सिंह ने जनता दरबार में बताया कि उन्होंने सड़क किनारे हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ न्यायालय में द्वितीय अपील दायर की थी। न्यायालय द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित होने के बावजूद अब तक कार्रवाई नहीं की गई है।
डीएम ने इस लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए अंचलाधिकारी करपी को निर्देश दिया कि न्यायालय के आदेश का पालन सुनिश्चित करते हुए अतिक्रमण हटाने की प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जाए।
विकलांग बच्ची के प्रमाण पत्र न बनने से परिवार परेशान
मेहंदिया थाना क्षेत्र के ग्राम बलिदाद निवासी सबाना खातून ने बताया कि उनकी 8 वर्षीय बेटी जन्म से ही शारीरिक रूप से विकलांग है। कई बार प्रयास के बावजूद आधार कार्ड और विकलांगता प्रमाण पत्र नहीं बन पाया, जिसके कारण उन्हें किसी भी प्रकार की सरकारी सहायता राशि नहीं मिल रही है।
इस संवेदनशील मामले पर डीएम ने सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा कोषांग अरवल को निर्देश दिया कि नियमानुसार सभी आवश्यक दस्तावेज तैयार कराकर परिवार को शीघ्र लाभ दिलाया जाए।
अधिकांश मामलों का मौके पर ही समाधान
जनता दरबार की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि अधिकांश मामलों का मौके पर ही समाधान कर दिया गया। जिन मामलों में प्रक्रिया लंबी थी, उनके लिए संबंधित विभागों को स्पष्ट समयसीमा के साथ निर्देश जारी किए गए।
डीएम अमृषा बैंस ने कहा—
“जनता दरबार का उद्देश्य केवल शिकायत सुनना नहीं, बल्कि उसका निष्पक्ष और त्वरित समाधान करना है। प्रशासन जनता के प्रति जवाबदेह है और रहेगा।”
पारदर्शी प्रशासन की ओर मजबूत कदम
जनता दरबार के माध्यम से जिला प्रशासन ने यह संदेश साफ कर दिया है कि—
- आम जनता की आवाज़ को गंभीरता से सुना जाएगा
- अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी
- योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचेगा
यह पहल न केवल प्रशासन और जनता के बीच भरोसे को मजबूत करती है, बल्कि सुशासन की दिशा में एक सशक्त कदम भी साबित हो रही है।
निष्कर्ष
अरवल में आयोजित यह जनता दरबार एक औपचारिक बैठक नहीं, बल्कि जनता के दर्द को समझने और समाधान देने का मंच बनकर उभरा। जिला पदाधिकारी अमृशा बैंस की सक्रियता और संवेदनशीलता ने यह साबित कर दिया कि अगर प्रशासन इच्छाशक्ति के साथ काम करे, तो समस्याओं का समाधान संभव है।