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श्रम कानून खत्म, मजदूरों के अधिकार छीने जा रहे—भाकपा-माले का सरकार पर सीधा आरोप


अरवल। संविधान दिवस के अवसर पर भाकपा-माले और किसान महासभा के बैनर तले आज पार्टी कार्यालय से एक जुलूस निकाला गया, जो विभिन्न मार्गों से होते हुए बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थल पहुंचा। कार्यकर्ताओं ने अंबेडकर की मूर्ति पर माल्यार्पण किया और वहीं एक विरोध सभा आयोजित की।

कार्यक्रम का नेतृत्व जिला कमिटी सदस्य सुऐब आलम ने किया। सभा को संबोधित करते हुए जिला सचिव जितेंद्र यादव ने केंद्र सरकार पर श्रम कानूनों को कमजोर करने और मजदूरों-किसानों के संवैधानिक अधिकारों को खत्म करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बाबा साहब द्वारा दिए गए 44 श्रम कानूनों को समाप्त कर श्रम संहिता लागू की जा रही है, जिससे मजदूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि पहले मजदूरों को मजदूरी न मिलने पर लेबर कोर्ट में जाने का अधिकार था, लेकिन अब वह भी सीमित कर दिया गया है। छोटे कारखानों के मजदूरों को यूनियन बनाने का अधिकार भी पूंजीपतियों की मर्जी पर निर्भर कर दिया गया है। पहले 8 घंटे काम का नियम था, लेकिन नई व्यवस्था के तहत 12 घंटे तक काम करवाए जाने का रास्ता खोल दिया गया है।

नेताओं ने आरोप लगाया कि 26 नवंबर 1949 को लागू संविधान ने गरीबों और वंचितों को अधिकार दिए थे, लेकिन आज भाजपा-आरएसएस उस पर लगातार हमला कर रहे हैं। बिहार सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा गया कि भाजपा-जदयू सरकार बनने के बाद दलितों-वंचितों के घरों पर बुलडोज़र चलाए जा रहे हैं। 5 डिसमिल जमीन देने का वादा अब तक पूरा नहीं हुआ, उल्टे गरीबों के घर और ठेले पर कार्रवाई की जा रही है, जिससे उनका जीवन-यापन प्रभावित हो रहा है।

नेताओं ने यह भी आरोप लगाया कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा और चुनाव आयोग मिलकर मतदाताओं की वोट चोरी करने में लगे थे।

कार्यक्रम में कामरेड उपेंद्र पासवान, राम दिनेश त्यागी, रामकुमार सिन्हा, नंदकिशोर कुमार, विजय पासवान, रमाकांत कुमार, अरविंद पासवान, दुर्गा कुमार, सुरेंद्र प्रसाद, उमेश कुमार चंद्रवंशी और गया प्रसाद सहित कई कार्यकर्ता मौजूद थे।
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