ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाइब्रेरी से मिल रहा नया सहारा कम शुल्क में बेहतर माहौल, परासी पंचायत में दीपक गुप्ता की पहल बनी मिसाल

ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को लाइब्रेरी से मिल रहा नया सहारा कम शुल्क में बेहतर माहौल, परासी पंचायत में दीपक गुप्ता की पहल बनी मिसाल

Satveer Singh
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अरवल। ग्रामीण इलाकों में शिक्षा के संसाधनों की कमी अक्सर विद्यार्थियों के सपनों को सीमित कर देती है। ऐसे में अगर गांव में ही पढ़ाई के लिए शांत और बेहतर माहौल मिल जाए, तो यह छात्रों के लिए किसी वरदान से कम नहीं होता। अरवल जिले के परासी पंचायत में इसी दिशा में एक सराहनीय पहल सामने आई है, जहां युवा समाजसेवी दीपक कुमार गुप्ता ने लाइब्रेरी खोलकर गरीब एवं ग्रामीण विद्यार्थियों को सस्ती और सुलभ पढ़ाई की सुविधा उपलब्ध कराई है।

आज के दौर में लाइब्रेरी पढ़ाई के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प बनकर उभरी है, खासकर उन छात्रों के लिए जो महंगे कोचिंग संस्थानों का खर्च वहन नहीं कर सकते। परासी पंचायत की यह लाइब्रेरी ऐसे ही विद्यार्थियों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आई है, जहां बेहद कम शुल्क में शांत वातावरण, किताबें और पढ़ाई का अनुकूल माहौल उपलब्ध कराया जा रहा है।

दीपक कुमार गुप्ता का कहना है कि उनकी इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना और गरीब विद्यार्थियों को बेहतर अवसर देना है। उन्होंने बताया कि अब तक इस लाइब्रेरी से करीब 1000 छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर चुके हैं, जिनमें से कई युवा आज विभिन्न क्षेत्रों में रोजगार प्राप्त कर चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि भविष्य में भी वह लाइब्रेरी की सुविधाओं को और बेहतर बनाने का प्रयास जारी रखेंगे ताकि अधिक से अधिक विद्यार्थियों को इसका लाभ मिल सके।

गौरतलब है कि सरकार द्वारा प्रत्येक पंचायत में सरकारी लाइब्रेरी खोलने के निर्देश दिए गए हैं और इसके लिए मुखिया को फंड भी उपलब्ध कराया जाता है। बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर अधिकांश पंचायतों में यह योजना अभी तक पूरी तरह लागू होती नहीं दिख रही है। ऐसे में दीपक गुप्ता जैसे युवाओं की पहल समाज के लिए प्रेरणादायक बन रही है।

ग्रामीण विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि गांव में ही पढ़ाई का ऐसा माहौल मिलना उनके बच्चों के भविष्य के लिए बहुत लाभदायक साबित हो रहा है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि हर पंचायत में सरकारी लाइब्रेरी की व्यवस्था जल्द से जल्द सुनिश्चित की जाए, ताकि अधिक से अधिक छात्र इसका लाभ उठा सकें।

परासी पंचायत की यह पहल साबित कर रही है कि अगर इच्छाशक्ति और समाज के प्रति जिम्मेदारी हो, तो सीमित संसाधनों में भी बड़े बदलाव की शुरुआत की जा सकती है।

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