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Bihar News: परीक्षा केंद्र में गूंजी किलकारी, BA की परीक्षा देते समय गर्भवती छात्रा ने दिया बच्चे को जन्म; समस्तीपुर के कॉलेज में बना यादगार पल


समस्तीपुर। बिहार के समस्तीपुर जिले से एक ऐसी खबर सामने आई है, जिसने परीक्षा के तनाव भरे माहौल को भावनाओं और खुशियों में बदल दिया। रोसड़ा प्रखंड के थतीया गांव स्थित शशि कृष्णा कॉलेज में उस वक्त सभी की आंखें नम और चेहरे मुस्कान से भर गए, जब स्नातक (बीए) की परीक्षा के दौरान एक गर्भवती छात्रा ने स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। परीक्षा केंद्र में अचानक गूंजी किलकारी ने पूरे कॉलेज परिसर को भावुक कर दिया।

यह घटना न सिर्फ महिला सशक्तिकरण की मिसाल है, बल्कि कर्तव्यनिष्ठ महिला कर्मियों की सूझबूझ और मानवीय संवेदनाओं का भी बेहतरीन उदाहरण बन गई है।


परीक्षा देने आई थी गर्भवती छात्रा, अचानक उठी प्रसव पीड़ा

घटना शनिवार की है। बेगूसराय जिले के छौड़ाही थाना क्षेत्र के मालपुर गांव निवासी शिवम कुमार की पत्नी रविता कुमारी बीए की पढ़ाई कर रही हैं। वह हसनपुर प्रखंड स्थित शकरपुरा भारद्वाज कॉलेज से स्नातक की छात्रा हैं और उनकी परीक्षा केंद्र रोसड़ा के शशि कृष्णा कॉलेज में निर्धारित थी।

रविता कुमारी गर्भवती थीं, लेकिन परीक्षा का शेड्यूल निकल जाने के कारण वह अन्य दिनों की तरह शनिवार को भी अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा देने परीक्षा केंद्र पहुंचीं। परीक्षा शुरू होने के कुछ समय बाद ही उन्हें अचानक प्रसव पीड़ा होने लगी।


महिला कर्मियों ने दिखाई सूझबूझ, खाली क्लास रूम बना डिलीवरी रूम

परीक्षा के दौरान छात्रा की तबीयत बिगड़ती देख वहां ड्यूटी पर तैनात महिला कर्मियों ने तुरंत स्थिति को समझा। बिना घबराए, उन्होंने मानवता और जिम्मेदारी का परिचय देते हुए रविता कुमारी को परीक्षा कक्ष से बाहर निकाला और कॉलेज के एक खाली क्लास रूम में ले गईं।

इसी बीच कॉलेज प्रशासन को सूचना दी गई और एम्बुलेंस बुलाने के लिए संपर्क किया गया। हालांकि, एम्बुलेंस के पहुंचने से पहले ही प्रसव की प्रक्रिया शुरू हो गई।


एम्बुलेंस से पहले ही हुआ सुरक्षित प्रसव, गूंजी किलकारी

महिला कर्मियों के सहयोग और साहस से रविता कुमारी ने कॉलेज परिसर के भीतर ही एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। जैसे ही बच्चे की किलकारी गूंजी, परीक्षा केंद्र का माहौल पूरी तरह बदल गया। जहां कुछ देर पहले परीक्षा की गंभीरता थी, वहां अब खुशी और राहत का माहौल बन गया।

कॉलेज परिसर में मौजूद शिक्षक, कर्मचारी और परीक्षार्थी इस अनोखी घटना से भावुक नजर आए। कई लोगों के लिए यह जीवन भर याद रहने वाला पल बन गया।


अस्पताल में जांच के बाद मां-बच्चा दोनों स्वस्थ

कुछ समय बाद एम्बुलेंस कॉलेज परिसर पहुंची, जिसके माध्यम से जच्चा और बच्चा दोनों को रोसड़ा अनुमंडलीय अस्पताल भेजा गया। अस्पताल में डॉक्टरों द्वारा जांच के बाद मां और नवजात दोनों को पूरी तरह स्वस्थ बताया गया।

डॉक्टरों के अनुसार, समय पर सही देखभाल और महिला कर्मियों की तत्परता के कारण किसी तरह की जटिलता नहीं आई। फिलहाल मां और बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।


महिला सशक्तिकरण की मिसाल बनी रविता कुमारी

रविता कुमारी की यह कहानी उन तमाम महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो शिक्षा और जिम्मेदारियों के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही हैं। गर्भावस्था जैसी नाजुक स्थिति में भी परीक्षा देने पहुंचना उनके जज्बे और शिक्षा के प्रति समर्पण को दर्शाता है।

स्थानीय लोगों और शिक्षाविदों का कहना है कि यह घटना साबित करती है कि महिलाएं हर परिस्थिति में आगे बढ़ सकती हैं, बशर्ते उन्हें सहयोग और संवेदनशील वातावरण मिले।


कॉलेज प्रशासन और महिला कर्मियों की हो रही सराहना

इस घटना के बाद शशि कृष्णा कॉलेज प्रशासन और वहां तैनात महिला कर्मियों की हर तरफ सराहना हो रही है। जिस तरह उन्होंने बिना घबराए तत्काल निर्णय लिया और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया, वह काबिले-तारीफ है।

स्थानीय स्तर पर लोग इसे “इंसानियत और जिम्मेदारी की मिसाल” बता रहे हैं। कई अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने कॉलेज प्रशासन के इस कदम की प्रशंसा की है।


चर्चा का विषय बनी परीक्षा केंद्र की यह अनोखी घटना

परीक्षा के दौरान बच्चे के जन्म की खबर अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है। सोशल मीडिया पर भी यह घटना तेजी से वायरल हो रही है, जहां लोग इसे सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर के रूप में देख रहे हैं।

लोगों का कहना है कि जहां अक्सर परीक्षा केंद्रों पर सख्ती और तनाव की खबरें आती हैं, वहीं यह घटना एक अलग और मानवीय तस्वीर पेश करती है।


निष्कर्ष: शिक्षा, संवेदना और जीवन का अनोखा संगम

समस्तीपुर के रोसड़ा स्थित इस परीक्षा केंद्र में जो हुआ, वह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि जीवन का उत्सव है। शिक्षा के मंदिर में नई जिंदगी का जन्म होना अपने आप में एक प्रतीकात्मक घटना है। यह बताता है कि शिक्षा, संवेदना और मानवीयता साथ-साथ चल सकती हैं।

यह खबर न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए एक सकारात्मक संदेश है—कि कठिन परिस्थितियों में भी अगर इंसानियत साथ दे, तो हर स्थिति को संभाला जा सकता है।

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