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उद्योग के नाम पर दलितों, गरीबों और किसानों की जमीन छिनने की साजिश नाकाम होगी – महानंद

उद्योग के नाम पर दलितों, गरीबों और किसानों की जमीन छिनने की साजिश नाकाम होगी – महानंद

अरवल: कलेर प्रखंड के कमता पंचायत के परशुरामपुर गांव में 1955 से खेती कर रहे महादलित, अतिपिछड़े और आम किसानों को उद्योग लगाने के नाम पर उनकी ज़मीन खाली करने का नोटिस जारी किए जाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया है। भाकपा माले के राज्य स्थाई समिति सदस्य और अरवल विधायक महानंद सिंह ने इस मुद्दे पर कहा कि सरकार की यह साजिश किसानों के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि उद्योग के नाम पर सैकड़ों एकड़ ज़मीन को कारपोरेट घरानों को सौंपने की मंशा है, जिसका विरोध किया जाएगा।


उद्योग के नाम पर दलितों, गरीबों और किसानों की जमीन छिनने की साजिश नाकाम होगी – महानंद


महानंद सिंह ने कहा कि यह ज़मीन 1955 में भूदान यज्ञ समिति द्वारा करीब 40 किसान परिवारों को दी गई थी, और आज इन परिवारों के पास बमुश्किल 5 से 10 कठे ज़मीन रह गई है। अगर इनकी ज़मीनें छीन ली जाती हैं तो इन किसानों के सामने भुखमरी की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि इस इलाके में किस प्रकार का उद्योग स्थापित किया जाएगा।

भाकपा माले के जिला सचिव जितेंद्र यादव ने भी इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि 7 फरवरी को जिला मुख्यालय पर और 10 फरवरी को प्रखंड मुख्यालयों पर बड़े पैमाने पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। उन्होंने किसानों के लिए पक्का मकान की योजना में हो रही धांधली और उर्वरक (खाद) बिक्री में हो रही गड़बड़ी का भी विरोध किया।

जमीन बचाने संघर्ष समिति ने 25 सदस्यीय समिति का गठन किया है, जिसमें नरेश साव को संयोजक और मुकेश तथा योगेंद्र साव को सह संयोजक चुना गया। समिति के सदस्य उमेश चंद्रवंशी, सूर्यनाथ मेहता और सुरेन्द्र प्रसाद ने भी इस आंदोलन को समर्थन दिया है।


किसानों का कहना है कि उनकी ज़मीन छिनने के खिलाफ उनका संघर्ष जारी रहेगा और वे किसी भी हालत में अपनी ज़मीन नहीं छोड़ेंगे।

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