अरवल। सरकार एक तरफ सभी पंचायतों में शवदाह गृह बनाने की घोषणा कर रही है, वहीं दूसरी ओर अरवल शहर के सोन नदी स्थित जनकपुर घाट पर बना अत्याधुनिक विद्युत शवदाह गृह पिछले लंबे समय से तैयार होने के बावजूद चालू नहीं हो सका है। करीब 2 करोड़ 75 लाख रुपये की लागत से बने इस प्रोजेक्ट में बिजली कनेक्शन तक लगा दिया गया है, लेकिन सिस्टम चालू नहीं होने से आम जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
लकड़ी के सहारे अंतिम संस्कार, लोगों की मजबूरी
वर्तमान में लोगों को शव जलाने के लिए पारंपरिक लकड़ी पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि निर्माणाधीन आधुनिक शवदाह गृह से 2 से 3 किलोमीटर दूर तक पैदल बालू में शव और लकड़ी ले जानी पड़ती है। बालू भरे रास्ते के कारण कई बार ट्रैक्टर का सहारा लेना मजबूरी बन जाता है। ऊपर से महंगी लकड़ी खरीदना आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस, फिर भी बंद
इस अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण बुडको (BUDCO) की देखरेख में चंद्रा ब्रदर्स द्वारा दिसंबर 2023 में शुरू किया गया था और एक साल में पूरा कर लिया गया। यहां पर—
• ऑटोमेटिक इलेक्ट्रिक भट्टी
• ऑटोमेटिक ट्रॉली सिस्टम
• प्रदूषण रहित सफेद धुआं निकालने के लिए 100 फीट ऊंची चिमनी
• लकड़ी शवदाह के लिए आधुनिक दो भट्टियां
• वेटिंग रूम, स्टोर रूम, स्टाफ रूम, कार्यालय
• अंतिम दर्शन के लिए बड़ा चबूतरा
• स्नानघर, शौचालय, यूरिनल और बाहर चार नल की व्यवस्था
जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह तैयार हैं।
लकड़ी के सहारे अंतिम संस्कार, लोगों की मजबूरी
वर्तमान में लोगों को शव जलाने के लिए पारंपरिक लकड़ी पर ही निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थिति यह है कि निर्माणाधीन आधुनिक शवदाह गृह से 2 से 3 किलोमीटर दूर तक पैदल बालू में शव और लकड़ी ले जानी पड़ती है। बालू भरे रास्ते के कारण कई बार ट्रैक्टर का सहारा लेना मजबूरी बन जाता है। ऊपर से महंगी लकड़ी खरीदना आम लोगों की जेब पर भारी पड़ रहा है।
आधुनिक सुविधाओं से लैस, फिर भी बंद
इस अत्याधुनिक शवदाह गृह का निर्माण बुडको (BUDCO) की देखरेख में चंद्रा ब्रदर्स द्वारा दिसंबर 2023 में शुरू किया गया था और एक साल में पूरा कर लिया गया। यहां पर—
• ऑटोमेटिक इलेक्ट्रिक भट्टी
• ऑटोमेटिक ट्रॉली सिस्टम
• प्रदूषण रहित सफेद धुआं निकालने के लिए 100 फीट ऊंची चिमनी
• लकड़ी शवदाह के लिए आधुनिक दो भट्टियां
• वेटिंग रूम, स्टोर रूम, स्टाफ रूम, कार्यालय
• अंतिम दर्शन के लिए बड़ा चबूतरा
• स्नानघर, शौचालय, यूरिनल और बाहर चार नल की व्यवस्था
जैसी सभी सुविधाएं पूरी तरह तैयार हैं।
सवाल – जब सब तैयार, तो चालू क्यों नहीं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर यह विद्युत शवदाह गृह चालू हो जाए तो न तो दूर तक शव ले जाना पड़ेगा, न ही महंगी लकड़ी खरीदने की जरूरत होगी। कम खर्च में सम्मानजनक अंतिम संस्कार संभव होगा और पर्यावरण भी सुरक्षित रहेगा।
क्या कहते हैं अधिकारी?
नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी मोनू कुमार का कहना है—
“बुडको द्वारा अभी तक आधुनिक शवदाह गृह नगर परिषद को हैंडओवर नहीं किया गया है। जैसे ही हैंडओवर होगा, इसे तुरंत चालू कर दिया जाएगा।”
जनता का अल्टीमेटम – अब और इंतजार नहीं!
स्थानीय नागरिकों का साफ कहना है कि करोड़ों की योजना बनकर भी अगर उपयोग में नहीं आती तो यह सीधे-सीधे जनता के साथ अन्याय है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि तुरंत हैंडओवर प्रक्रिया पूरी कर शवदाह गृह चालू कराया जाए, ताकि आम जनता को राहत मिल सके।
अब देखना यह है कि प्रशासन कब जागता है और करोड़ों की लागत से बने इस आधुनिक शवदाह गृह को कब तक चालू करता है या फिर यह यूं ही शोपीस बना रहेगा।
