जनकपुर धाम से बालू निकासी पर रोक लगाने की मांग तेज, ग्रामीणों ने की आपात बैठक

जनकपुर धाम से बालू निकासी पर रोक लगाने की मांग तेज, ग्रामीणों ने की आपात बैठक

Satveer Singh
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अरवल। जनकपुर घाट से बालू निकासी शुरू किए जाने की आशंका ने क्षेत्र की जनता में गहरी नाराजगी पैदा कर दी है। इसी मुद्दे को लेकर शाही मोहल्ला, पुरानी अरवल और नदी किनारे के ग्रामीणों ने रविवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की। बैठक में बड़ी संख्या में स्थानीय पुरुष, युवा और महिलाओं ने हिस्सा लिया और बालू निकासी का पुरजोर विरोध करने का संकल्प लिया।

ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि जनकपुर धाम से हर हाल में बालू निकासी रोकनी होगी, क्योंकि यह रास्ता धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहां स्थित श्मशान घाट पर प्रतिदिन बड़ी संख्या में लोग अंतिम संस्कार के लिए आते हैं। इसके अलावा जनकपुर धाम मंदिर में पूजा-पाठ, शादी-विवाह के कार्यक्रम और छठ पूजा, गंगा स्नान, मकर संक्रांति जैसे प्रमुख पर्वों के दौरान लाखों श्रद्धालु इसी मार्ग से गुजरते हैं।

ग्रामीणों ने बताया कि इसी मार्ग से हज़रत मखदूम शाह शमसुद्दीन रहमतुल्लाह अलेह का मजार भी स्थित है, जहां सभी समुदायों के लोग प्रतिदिन आते-जाते हैं। इतना ही नहीं, बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं का विद्यालय जाना भी इसी घनी आबादी वाले मार्ग से होता है। ऐसे में भारी बालू लदे ट्रकों का आवागमन यहां न केवल असुरक्षित है, बल्कि धार्मिक वातावरण और जनजीवन के लिए भी खतरा है।

ग्रामीणों का कहना है कि पहले अरवल-सहार पुल के पास स्थित मल्ही पट्टी मार्ग से ही ट्रकों के द्वारा बालू निकासी होती थी, जो उपयुक्त और सुरक्षित मार्ग है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जनकपुर धाम वाले रास्ते से ट्रक चलाने की कोशिश की गई तो जनता सड़क पर उतरकर उन्हें रोक देगी। लोगों ने कहा कि वे इस मुद्दे पर आंदोलन के लिए भी तैयार हैं।

बैठक में मो. मुश्ताक शाह, संजय कुमार, मो. बसरुद्दीन शाह, पप्पू कुमार, मो. जमालुद्दीन, मो. सलमान खान, मो. राशिद शाह, खुर्शीद आलम, जीशान खान, मो. अरमान हुसैन, नसीमा खातून, रेहाना खातून, ज़हदा खातून सहित कई महिलाएं उपस्थित रहीं।

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