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बांग्लादेश में हिंसा का उबाल: उस्मान हादी की मौत के बाद ढाका समेत कई शहरों में उग्र प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़

ढाका। बांग्लादेश में उस्मान हादी की मौत की खबर सामने आने के बाद हालात तेजी से बिगड़ते जा रहे हैं। अंतरिम नेता मुहम्मद यूनुस के राष्ट्र के नाम संबोधन के बाद देशभर में उग्र तत्व सक्रिय हो गए हैं। राजधानी ढाका समेत कई इलाकों में रात के अंधेरे में हिंसक प्रदर्शन, आगजनी और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आ रही हैं। पहले से तनावपूर्ण माहौल अब हिंसा और मौतों के साथ और विकराल रूप ले चुका है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में देखा जा सकता है कि उग्र प्रदर्शनकारी “अल्लाहू अकबर” के नारे लगाते हुए सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को आग के हवाले कर रहे हैं। कुछ वीडियो में प्रदर्शनकारी पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की मांग करते हुए यूनुस सरकार के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते नजर आ रहे हैं।

ढाका में हालात तनावपूर्ण, धानमंडी-32 बना हिंसा का केंद्र

राजधानी ढाका के कई इलाकों में हालात बेहद तनावपूर्ण बने हुए हैं। धानमंडी-32 इलाके में उस्मान हादी की मौत के बाद एक बार फिर हिंसा भड़क उठी। यह इलाका बांग्लादेश के संस्थापक शेख मुजीबुर रहमान के पैतृक घर के लिए जाना जाता है, जिसके चलते यहां सुरक्षा एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है। गुरुवार रात बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ गई।

बंगाली भाषा के प्रमुख दैनिक समाचार पत्र डेली इत्तेफाक ने फेसबुक पर प्रदर्शन से जुड़े वीडियो साझा किए हैं, जिनमें उग्र भीड़ आगजनी करते हुए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करती दिख रही है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि देश की मौजूदा हालत के लिए मौजूदा नेतृत्व जिम्मेदार है।

आवामी लीग के नेता के घर पर हमला

हिंसा की आग राजधानी तक सीमित नहीं रही। चटगांव के शोलाशहर इलाके में प्रदर्शनकारियों ने आवामी लीग के संगठन सचिव और पूर्व शिक्षा मंत्री मोहिबुल हसन चौधरी नवफेल के घर को निशाना बनाया। उग्र भीड़ जबरन घर में घुस गई और वहां जमकर तोड़फोड़ के बाद आगजनी की। घटना के बाद इलाके में दहशत का माहौल है।

मीडिया संस्थानों पर भी हमला

बांग्लादेश में जारी हिंसा के दौरान मीडिया संस्थान भी उग्रवादियों के निशाने पर हैं। देश के प्रतिष्ठित अखबार ‘प्रथम आलो’ के दफ्तर में तोड़फोड़ की गई, जबकि इसके बाद ‘डेली स्टार’ के कार्यालय को भी निशाना बनाया गया। इन हमलों से प्रेस की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

हालात काबू में करने की कोशिश

हालांकि, सुरक्षा बल हालात को काबू में करने की कोशिश कर रहे हैं और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। बावजूद इसके, देश में तनाव बरकरार है और आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका जताई जा रही है।

कुल मिलाकर, उस्मान हादी की मौत ने बांग्लादेश में सुलग रही अस्थिरता को हिंसक आग में बदल दिया है। राजनीतिक असंतोष, उग्र नारेबाजी और लगातार बढ़ती हिंसा ने देश की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

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