रिपोर्ट:- सतवीर सिंह
अरवल सदर अस्पताल में मरीजों को रेफर करने की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल परिसर और उसके आसपास दलाल सक्रिय हैं, जो रात के समय रेफर किए गए मरीजों और उनके परिजनों को सरकारी व्यवस्था के बजाय निजी अस्पतालों की ओर ले जाते हैं। आरोप है कि इस पूरे नेटवर्क में दलाली के बदले मोटी रकम का लेन-देन होता है।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि सदर अस्पताल से रेफर किए गए मरीजों को पहले कुछ निजी अस्पतालों में भर्ती कराया जाता है। यदि वहां उपचार या ऑपरेशन नहीं हो पाता, तो उन्हें पटना के बड़े निजी अस्पतालों में भेज दिया जाता है। आरोप है कि इस प्रक्रिया में मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाकर दलालों को अस्पतालों से कमीशन दिया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
इसी क्रम में एक मामले का भी उल्लेख किया गया है। शिकायत के अनुसार, 27 जून 2026 की रात एक एनीमिक गर्भवती महिला को प्रसव के लिए अरवल सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बाद में उसे बेहतर इलाज के नाम पर रेफर कर दिया गया। आरोप है कि अस्पताल से बाहर निकलते ही दलालों ने मरीज को अपने संपर्क में लेकर पहले एक निजी अस्पताल और फिर पटना के एक निजी अस्पताल में भर्ती करा दिया। बताया गया कि अब मरीज अपने घर लौट चुकी है, लेकिन उसकी तबीयत अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं है। पीड़िता का घर रामपुर चौरम थाना क्षेत्र में बताया जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, अस्पताल परिसर में दलालों पर सख्त कार्रवाई करने तथा रेफरल प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की मांग की है। उनका कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिए आने वाले मरीजों की सुरक्षा और भरोसा कायम रखना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
एक बार दलालों पर FIR भी हुआ था लेकिन वह भी ठंडा बस्ता में रख दिया गया और यह दलाल का मनोबल बढ़ता चला गया स्थित है कि पेशेंट बेचारा के पैसा है या ना रहे निजी अस्पताल में ले जाकर पटना हॉस्पिटल में भेज दिया जाता है।
प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग का पक्ष:
इस संबंध में जिला प्रशासन या स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया समाचार लिखे जाने तक प्राप्त नहीं हो सकी। प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
