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18 साल पुराने जानलेवा हमले में पांच दोषियों को सजाझंझारपुर व्यवहार न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला


18 साल पुराने जानलेवा हमले में पांच दोषियों को सजा
झंझारपुर व्यवहार न्यायालय का ऐतिहासिक फैसला


मधुबनी। झंझारपुर व्यवहार न्यायालय के जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम बालेन्द्र शुक्ला की अदालत ने मंगलवार को 18 साल पुराने जानलेवा हमले के मामले में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए पांच अभियुक्तों को विभिन्न धाराओं में सजा दी।

क्या था मामला?
यह घटना मधुबनी जिले के फुलपरास थाना क्षेत्र के सिसवार गांव की है। 28 मार्च 2007 को बांस काटने को लेकर दो गोतिया परिवारों के बीच विवाद हुआ, जो देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। इस घटना में सत्यनारायण ठाकुर गंभीर रूप से घायल हो गए थे। मामले में फुलपरास थाना में कांड संख्या 69/2007 दर्ज की गई थी। नामजद अभियुक्तों में हरेराम ठाकुर, राम अवतार ठाकुर, राम अशीष ठाकुर, शंकर ठाकुर और सज्जन ठाकुर शामिल थे।

कोर्ट का निर्णय
लंबी सुनवाई के बाद अदालत ने सभी अभियुक्तों को दोषी पाया।
हरेराम ठाकुर और राम अवतार ठाकुर को धारा 307 के तहत 7-7 वर्ष का कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपये जुर्माना की सजा सुनाई गई। जुर्माना नहीं देने पर 6-6 माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

राम अशीष ठाकुर, शंकर ठाकुर और सज्जन ठाकुर को धारा 307 के तहत 3-3 वर्ष का कठोर कारावास और 7-7 हजार रुपये जुर्माना की सजा दी गई। जुर्माना नहीं देने पर इन्हें भी 6-6 माह का साधारण कारावास भुगतना पड़ेगा।
इसके अलावा सभी को धारा 323, 341, 427, 447 के तहत भी साधारण कारावास की सजा सुनाई गई है। अदालत ने आदेश दिया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी।


दलीलों की टक्कर
सरकार की ओर से सहायक लोक अभियोजक इंद्रकांत प्रसाद ने पैरवी की, जबकि बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता जितेंद्र कुमार और शिवकुमार झा ने पक्ष रखा। दोनों पक्षों की बहस के बाद न्यायालय ने यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

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